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	<title>World News &#8211; Dhurva News</title>
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		<title>राजस्थान बॉर्डर पर बुलडोज़र एक्शन: बाड़मेर-जैसलमेर में अवैध कब्जों पर बड़ी कार्रवाई, सीमा सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बना चर्चा का केंद्र</title>
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		<dc:creator><![CDATA[dhurvanews@gmail.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 07:15:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Local News]]></category>
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		<category><![CDATA[Rajasthan Encroachment]]></category>
		<category><![CDATA[अवैध कब्जा]]></category>
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		<category><![CDATA[राजस्थान बुलडोज़र कार्रवाई]]></category>
		<category><![CDATA[राजस्थान ब्रेकिंग न्यूज़]]></category>
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					<description><![CDATA[बाड़मेर/जैसलमेर &#124; धुर्वा न्यूज़ विशेष राजस्थान के सीमावर्ती जिलों बाड़मेर और जैसलमेर में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ चल रही प्रशासनिक कार्रवाई ने पूरे प्रदेश में बहस छेड़ दी है। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों में चल रहे इस अभियान के दौरान कई अवैध निर्माण हटाए गए हैं। प्रशासन के अनुसार, इनमें [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बाड़मेर/जैसलमेर | धुर्वा न्यूज़ विशेष</strong></p>



<p>राजस्थान के सीमावर्ती जिलों <strong>बाड़मेर और जैसलमेर</strong> में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ चल रही प्रशासनिक कार्रवाई ने पूरे प्रदेश में बहस छेड़ दी है। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों में चल रहे इस अभियान के दौरान कई अवैध निर्माण हटाए गए हैं। प्रशासन के अनुसार, इनमें कुछ ऐसे धार्मिक ढांचे भी शामिल हैं जो सरकारी भूमि पर बिना वैध अनुमति बने पाए गए।</p>



<p>इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक तीखी चर्चा देखने को मिल रही है। समर्थक इसे <strong>कानून का समान अनुपालन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम</strong> बता रहे हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि प्रत्येक मामले में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिए।</p>



<h2 class="wp-block-heading">सीमा सुरक्षा क्यों बनी प्राथमिकता?</h2>



<p>प्रशासन का कहना है कि भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर अनधिकृत निर्माण सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन सकते हैं। इसी कारण सर्वे के बाद चिन्हित अतिक्रमणों के विरुद्ध चरणबद्ध कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित पक्षों को नोटिस देने और कानूनी प्रक्रिया अपनाने के बाद ही कार्रवाई की जा रही है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">किन इलाकों में हुई कार्रवाई?</h2>



<p class="has-medium-font-size">बाड़मेर के <strong>गडरा रोड, सेड़वा और रामसर</strong> तथा जैसलमेर के <strong>नाचना</strong> सहित कई सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासन ने अवैध कब्जे हटाने का अभियान चलाया है। प्रशासन का दावा है कि कार्रवाई सरकारी रिकॉर्ड और भूमि अभिलेखों के आधार पर की गई।</p>



<h2 class="wp-block-heading">राजनीतिक बयानबाजी तेज</h2>



<p>कार्रवाई के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। विपक्ष ने कार्रवाई की प्रक्रिया और चयन के मानदंडों पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार का कहना है कि <strong>कानून की नजर में सभी समान हैं</strong> और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी व्यक्ति या संस्था का हो, नियमों के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।</p>



<h2 class="wp-block-heading">स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया</h2>



<p>कुछ स्थानीय निवासियों और धार्मिक संस्थाओं ने दावा किया है कि कुछ ढांचे वर्षों से मौजूद थे और उनके ऐतिहासिक महत्व की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिनके पास वैध दस्तावेज हैं, उन्हें कानून के अनुसार पूरा अवसर दिया जाएगा।</p>



<h2 class="wp-block-heading">आगे क्या?</h2>



<p>प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार सीमावर्ती क्षेत्रों में सर्वे और सत्यापन का कार्य जारी है। यदि सरकारी भूमि पर अन्य अवैध कब्जे पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह अभियान और व्यापक हो सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">निष्कर्ष</h2>



<p>बाड़मेर और जैसलमेर में चल रही यह कार्रवाई अब केवल अतिक्रमण हटाने का मामला नहीं रह गई है। यह <strong>राष्ट्रीय सुरक्षा, सरकारी भूमि के संरक्षण, कानून के समान अनुपालन और स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था</strong> से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। अंतिम निर्णय प्रत्येक मामले में उपलब्ध दस्तावेजों, प्रशासनिक रिकॉर्ड और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।</p>
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		<title>डा.मुकेश जैन को मिला राष्ट्रीय सेवा योजना का राज्य स्तरीय पुरस्कार,उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने किया सम्मानित</title>
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		<dc:creator><![CDATA[dhurvanews@gmail.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 12:59:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Local News]]></category>
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		<category><![CDATA[Indian politics today]]></category>
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					<description><![CDATA[राजकीय महाविद्यालय बाड़मेर मे़ पदस्थापित असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मुकेश जैन को सत्र 2024-25 के लिए राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी के रूप में उल्लेखनीय सेवाओं के लिए राष्ट्रीय सेवा योजना के राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्राचार्य डॉ. मृणाली चौहान ने बताया कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय अजमेर में आयुक्तालय कॉलेज [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p><br><br>राजकीय महाविद्यालय बाड़मेर मे़ पदस्थापित असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मुकेश जैन को सत्र 2024-25 के लिए राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी के रूप में उल्लेखनीय सेवाओं के लिए राष्ट्रीय सेवा योजना के राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्राचार्य डॉ. मृणाली चौहान ने बताया कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय अजमेर में आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा राजस्थान जयपुर की ओर से आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना के राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह में उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने सत्र 2024-25 के लिए एन एस एस के उत्कृष्ट कार्यक्रम अधिकारी का राज्य स्तरीय पुरस्कार सहायक आचार्य डॉ. मुकेश जैन को प्रदान किया इस अवसर पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, कॉलेज शिक्षा राजस्थान के संयुक्त निदेशक अकादमिक विजयसिंह जाट, एन एस एस के क्षेत्रीय निदेशक एस पी भटनागर, एन एस एस के राज्य समन्वयक कृष्ण कुमार कुमावत भी उपस्थित रहे। प्राचार्य डॉ. मृणाली चौहान ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि एनएसएस स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम अधिकारी डॉ. मुकेश जैन के निर्देशन में ने सामाजिक जिम्मेदारी, सेवा भावना और राष्ट्र निर्माण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए हैं उल्लेखनीय है कि सत्र 2024-25 के दौरान स्वच्छता अभियान,आरडी परेड, वृक्षारोपण, नशामुक्ति अभियान, मतदाता एवं उपभोक्ता जागरूकता, लैंगिक संवेदनशीलता, फायर सेफ्टी, आपदा प्रबंधन, नागरिक सुरक्षा एवं साइबर सुरक्षा जैसे विषयों पर कार्यशालाओं, नाट्य प्रशिक्षण शिविरों और जन-जागरूकता कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया इन गतिविधियों ने विद्यार्थियों के साथ-साथ स्थानीय समुदाय में भी व्यापक सामाजिक चेतना का संचार किया। साथ ही सामाजिक, सांस्कृतिक एवं खेलकूद गतिविधियों में भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया कार्यक्रम अधिकारी वीरसिंह भाटी के अनुसार डॉ. मुकेश जैन को एन एस एस गतिविधियों के समयबद्ध कार्य निष्पादन, गतिविधियों के सफल संचालन एवं उपलब्धियों के आधार पर राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए निर्धारित चयन प्रक्रिया के जरिए चुना गया। कार्यक्रम अधिकारी अरविंद कुमार के अनुसार एनएसएस स्वयंसेवकों ने डॉ. मुकेश जैन के निर्देशन में राष्ट्रीय एकता शिविर, यूथ पार्लियामेंट, यातायात प्रशिक्षण शिविर, नशा मुक्ति कार्यक्रम तथा स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों में भी सक्रिय भागीदारी निभाई पुरस्कार प्राप्ति पर डॉ. मुकेश जैन ने इस सम्मान को एनएसएस स्वयंसेवकों को समर्पित करते हुए कहा कि युवाओं में सेवा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का भाव विकसित करना ही एनएसएस का मूल उद्देश्य है</p>
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		<title>ईरान संकट का असर: अब 14.2 किलो के सिलेंडर में मिलेगी केवल 10 किलो गैस! OMCs की नई रणनीति</title>
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		<dc:creator><![CDATA[dhurvanews@gmail.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 09:32:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Local News]]></category>
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		<category><![CDATA[ईरान संकट]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली &#124; 23 मार्च, 2026 अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने भारत की रसोई के बजट और आपूर्ति श्रृंखला को हिला कर रख दिया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बाधित होने के कारण भारत में एलपीजी (LPG) के आयात में भारी गिरावट आई है। देश [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><br>नई दिल्ली | 23 मार्च, 2026</p>



<p><br>अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने भारत की रसोई के बजट और आपूर्ति श्रृंखला को हिला कर रख दिया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बाधित होने के कारण भारत में एलपीजी (LPG) के आयात में भारी गिरावट आई है। देश में खाना पकाने वाली गैस के घटते स्टॉक को देखते हुए सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) अब एक अभूतपूर्व कदम उठाने पर विचार कर रही हैं।<br>क्या है नया प्रस्ताव?</p>



<p><br>मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, तेल कंपनियां अब घरों में इस्तेमाल होने वाले मानक 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर को पूरी तरह भरने के बजाय, उसमें केवल 10 किलोग्राम गैस भरकर सप्लाई करने की योजना बना रही हैं।<br>रणनीति के पीछे का मुख्य उद्देश्य<br>इस कदम का मुख्य लक्ष्य &#8220;राशनिंग&#8221; के जरिए उपलब्ध गैस को अधिक से अधिक परिवारों तक पहुँचाना है।<br> </p>



<p> समान वितरण: 14.2 किलो का एक सिलेंडर औसतन 35-40 दिन चलता है। यदि इसमें 10 किलो गैस दी जाती है, तो यह लगभग 25-30 दिन चलेगा, जिससे कम स्टॉक में भी ज्यादा उपभोक्ताओं को रिफिल मिल सकेगी।<br> * पैनिक बुकिंग पर रोक: स्टॉक कम होने की खबरों के बीच लोग &#8216;पैनिक बुकिंग&#8217; कर रहे हैं। कम मात्रा की सप्लाई से सरकार इस स्थिति को नियंत्रित करना चाहती है।<br> </p>



<p> कीमतों में राहत: रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ताओं से केवल 10 किलो गैस की ही कीमत वसूली जाएगी, जिससे प्रति सिलेंडर तत्काल खर्च कम हो सकता है।<br>हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है महत्वपूर्ण?</p>



<p><br>भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60% आयात करता है, और इस आयात का करीब 90% हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। यह सभी जहाज &#8216;हॉर्मुज जलडमरूमध्य&#8217; के संकीर्ण रास्ते से होकर गुजरते हैं। ईरान और अमेरिका के युद्ध ने इस मार्ग को असुरक्षित बना दिया है, जिससे भारत आने वाले कई गैस टैंकर या तो फंसे हुए हैं या उन्हें लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।<br>चुनौतियां और कार्यान्वयन</p>



<p><br>हालांकि यह योजना कागजों पर प्रभावी दिख रही है, लेकिन इसे लागू करना आसान नहीं होगा:<br>  सॉफ्टवेयर और वेटिंग सिस्टम: बॉटलिंग प्लांट में मशीनों को 10 किलो वजन के लिए फिर से री-कैलिब्रेट करना होगा।</p>



<p><br>  कानूनी प्रक्रिया: वजन और माप विभाग से इसके लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होगी।<br>  वितरण लागत: सिलेंडर की संख्या बढ़ने से वितरकों (Distributors) की डिलीवरी लागत बढ़ सकती है।<br>पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, यदि अगले कुछ दिनों में खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति सामान्य नहीं होती है, तो इस &#8217;10 किलोग्राम फॉर्मूले&#8217; को जल्द ही पूरे देश में लागू किया जा सकता है।</p>



<p></p>
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		<title>रेगिस्तान में दम तोड़ता जल जीवन मिशन बाड़मेर-बालोतरा के हजारों गांवों में नलों से आ रहा ‘जहरीला’ पानी, 5 साल में सिर्फ 21% काम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[dhurvanews@gmail.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Mar 2026 07:58:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Local News]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
		<category><![CDATA[World News]]></category>
		<category><![CDATA[जल जीवन मिशन]]></category>
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					<description><![CDATA[बाड़मेर: विश्व जल दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य हर व्यक्ति तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने की जरूरत को रेखांकित करना है, लेकिन इसके विपरीत राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर और बालोतरा जैसे जिलों में हालात चिंताजनक हैं। जहां हजारों गांव-ढाणियों के लोग आज भी आर्सेनिक और फ्लोराइड युक्त पानी पीने को [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p>बाड़मेर: <br>विश्व जल दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य हर व्यक्ति तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने की जरूरत को रेखांकित करना है, लेकिन इसके विपरीत राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर और बालोतरा जैसे जिलों में हालात चिंताजनक हैं। जहां हजारों गांव-ढाणियों के लोग आज भी आर्सेनिक और फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर हैं।जलजीवन मिशन जैसी योजनाओं के बावजूद शुद्ध पानी का सपना यहां अब भी अधूरा है। देश के 11,488 गांव-बस्तियां आज भी शुद्ध पानी को तरस रहे हैं। बाड़मेर के 5,472 और बालोतरा की 1,015 गांव ढाणी के लोग आर्सेनिक और फ्लोराइड युक्त पानी पी रहे हैं।<br><br>केंद्र सरकार ने जेजेएम के तहत इन क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति 8 से 10 लीटर प्रतिदिन गुणवत्तापूर्वक पानी पहुंचाने के निर्देश राज्य सरकार को दिए गए हैं। लेकिन अभी तक इसकी भी पालना नहीं हो पाई है। योजना के तहत देशभर में 2030 तक शुद्ध एवं गुणवत्तायुक्त पानी पहुंचाने का उद्देश्य तय किया गया है। देश में अभी तक 19.36 करोड़ परिवारों में से 15.82 करोड़ परिवारों तक हर घर नल के जरिए पानी पहुंच पाया है।<br><br>कमजोर राजनीतिक पैरवी:<br><br>साल 2019 में जलजीवन मिशन प्रारंभ होने के बाद से ही बाड़मेर-जैसलमेर और बालोतरा अंतिम स्थिति में है। कमजोर राजनीतिक पैरवी के चलते इन जिलों में योजना की प्रगति नहीं हो पाई है।</p>



<p><br>केंद्र सरकार ने यह दिए थे निर्देश:<br><br>पाइपगत जलापूर्ति योजना बनाएं<br>आर्सेनिक और फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक जलशोधन यंत्र (सीडब्ल्यूपीपी) स्थापित करें<br>प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पाइप लाइन से 8 से 10 लीटर पानी उपलब्ध करवाएं<br><br>नहीं मिला नहरी जल:<br><br>जलजीवन मिशन को लेकर बाड़मेर, जैसलमेर और बालोतरा जिला अभी फिसड्डी स्थिति में है। यहां दूर गांव ढाणियों में पानी नहीं पहुंचा है। दूरस्थ इलाका और नहरी जल की उपलब्धता नहीं होने से मिशन के तहत हर घर नल का सपना अभी भी अधूरा है।<br><br>इसलिए हैं ऐसे हालात:<br><br>बाड़मेर, जैसलमेर और बालोतरा जिले में शुद्ध पानी को लेकर नहरी परियोजनाएं तो बनी हैं, लेकिन पानी घरों तक नहीं पहुंचा। धीमी गति से चल रहे कार्य के चलते यह दिक्कत आ रही है। वहीं, पाताल का पानी भी नीचे जा पहुंचा है। इस कारण यहां लोगों को खारा पानी या अशुद्ध पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है।<br><br>रेगिस्तान में ‘जल जीवन मिशन’ हांफता, 5 साल में सिर्फ 21% प्रगति:<br><br>रेगिस्तानी बाड़मेर में बहुप्रतीक्षित जल जीवन मिशन अब धीमी रफ्तार के कारण दम तोड़ता नजर आ रहा है। पांच वर्षों से चल रही इस महत्वाकांक्षी योजना की जमीनी हकीकत यह है कि अब तक कुल लक्ष्य का महज 21.27 फीसदी ही कार्य पूरा हो सका है। ऐसे में ग्रीष्म ऋतु की दस्तक के साथ ही हजारों ग्रामीण परिवारों के सामने पेयजल संकट की आशंका गहरा गई है।योजना के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन 2,66,333 परिवारों में से अब तक केवल 58,214 घरों तक ही कनेक्शन पहुंच पाए हैं, जो करीब 21.30 प्रतिशत है। अगस्त 2019 तक यह आंकड़ा मात्र 2.35 फीसदी था, जिससे साफ है कि प्रगति अपेक्षित गति से बहुत पीछे चल रही है।<br><br>एक नजर में प्रोजेक्ट की स्थिति:<br><br>लघु योजनाएं: 82.72 करोड़, 64 गांव &#8211; वित्तीय प्रगति 44.97 करोड़, जल कनेक्शन 91.26%<br>बाड़मेर लिफ्ट परियोजना पार्ट A: 212.83 करोड़, 99 गांव &#8211; वित्तीय 144.21 करोड़, जल प्रगति 37.10%<br>पार्ट B: 155.17 करोड़, 84 गांव &#8211; वित्तीय 86.30 करोड़, जल प्रगति 44.50%<br>पार्ट C: 440 करोड़, 346 गांव &#8211; वर्क ऑर्डर जारी<br>पोकरण-फलसूंड-बालोरा-सिवाना (पार्ट 4): 239.43 करोड़, 10 गांव &#8211; 100% प्रगति<br>नर्मदा नहर आधारित रामसर-गडरारोड़: 167.25 करोड़, 217 गांव &#8211; 99.48% प्रगति<br>नर्मदा आधारित गुड़ामालानी-चौहटन: 3197.34 करोड़, 822 गांव &#8211; टेंडर प्रक्रिया में<br>कुल: 4494.76 करोड़, 1642 गांव &#8211; 389.82 करोड़ व्यय, 21.27% प्रगति<br><br>जमीनी हकीकत पाइपलाइन बिछी, पानी नहीं:<br><br>ग्रामीणों का आरोप है कि कई गांवों में पाइपलाइन डालने का काम अधूरा पड़ा है, वहीं जहां कनेक्शन दिए गए हैं, वहां भी नियमित पानी सप्लाई नहीं हो रही। महीनों से अधूरे पड़े कार्यों ने लोगों की उम्मीदों को तोड़ दिया है। महिलाओं और बच्चों को आज भी दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है, जिससे उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।<br><br>शिव’ क्षेत्र में भी अटका काम:<br><br>जून 2025 में जल जीवन मिशन फेस-3 के तहत 338 करोड़ रुपए की योजना स्वीकृत हुई थी। इसमें शिव के 187, बाड़मेर ग्रामीण के 156 और बायतु के 3 गांवों सहित कुल 346 गांवों को शामिल किया गया। इस कार्य के लिए जोधपुर की दारा कंस्ट्रक्शन कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी हुआ, लेकिन जमीनी प्रगति अभी भी संतोषजनक नहीं है।<br><br>गर्मी शुरू, संकट गहराया:<br><br>मार्च के पहले सप्ताह से ही तेज गर्मी ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। तालाब सूखने की कगार पर हैं और कई गांवों व ढाणियों में पेयजल संकट गहराने लगा है। ग्रामीणों को मजबूरी में महंगे दामों पर पानी खरीदना पड़ रहा है। पशुपालकों के सामने भी पशुधन के लिए पानी की व्यवस्था करना चुनौती बन गया है।<br><br>बढ़ती नाराजगी, अधूरा सपना:<br><br>जल जीवन मिशन से ग्रामीणों को बड़ी उम्मीद थी, लेकिन धीमी प्रगति और अधूरे कार्यों ने लोगों में नाराजगी बढ़ा दी है। हालात यह हैं कि हर घर नल से जल का सपना अब भी अधूरा है, और इस बार भी गर्मी में बाड़मेर के हजारों परिवारों को पानी के लिए जूझना पड़ सकता है।<br><br>एक नजर बॉर्डर के गांव:<br><br>हरसाणी कस्बा: आगासड़ी गांव से आने वाली पाइपलाइन एक महीने से बंद, जेजेएम योजना भी सुचारू नहीं होने से गर्मी में आमजन व पशु दोनों परेशान।<br><br>गिराब क्षेत्र: जलकुंड सूखे, पर्याप्त जल भंडार के बावजूद सप्लाई ठप और कार्मिकों की कमी से व्यवस्था चरमराई।<br><br>डीएनपी गांव: ग्रामीण आज भी बेरियों पर निर्भर हैं। सप्ताह में एक बार पानी, आधे घरों तक भी पर्याप्त सप्लाई नहीं।जेजेएम की जमीनी हकीकत-नोपाट पंचायत की मिसरी की ढाणी में एक साल से पंप हाउस अधूरा-कई जगह वॉल्व नहीं, तो कहीं बिजली कनेक्शन का अभाव-एक कर्मचारी के भरोसे कई गांवों की जल सप्लाई-पाइपलाइन पर खर्च, लेकिन नियमित जल वितरण पर ध्यान नहीं</p>
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		<title>सीएम भजनलाल का कलेक्ट्रेट को आदेश:बारिश से खराबे की गिरदावरी होगी, पटवारियों से मांगी सूचना</title>
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		<pubDate>Sun, 22 Mar 2026 06:15:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बाड़मेर :बेमौसम हुई बारिश से जिले में रबी की फसलों को जबरदस्त नुकसान हुआ है। करीब दो दिन बाद अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सभी जिला कलेक्टरों को रबी फसलों में हुए खराबे के नुकसान का आंकलन कर गिरदावरी करने के आदेश दिए है। इसके लिए अब तहसीलदारों ने सभी पटवारियों से उनके अधीन पटवार [&#8230;]]]></description>
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<p>बाड़मेर :<br>बेमौसम हुई बारिश से जिले में रबी की फसलों को जबरदस्त नुकसान हुआ है। करीब दो दिन बाद अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सभी जिला कलेक्टरों को रबी फसलों में हुए खराबे के नुकसान का आंकलन कर गिरदावरी करने के आदेश दिए है। इसके लिए अब तहसीलदारों ने सभी पटवारियों से उनके अधीन पटवार हल्कों बारिश, ओलावृष्टि से हुए नुकसान की सूचना मांगी है<br><br>गौरतलब है कि 19 मार्च की रात 2 बजे भीषण आंधी के साथ बारिश और ओलावृष्टि हुई थी इससे ईसगोल, जीरा सहित अन्य फसलों को जबरदस्त नुकसान हुआ है। कई किसानों की फसल तो पूरी तरह से नष्ट हो गई, इससे वो कर्जदार हो गए है<br><br>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रदेश के विभिन्न अंचलों में हुई अतिवृष्टि से अन्नदाताओं को हुए नुकसान का आंकलन करने के लिए सभी जिला कलेक्टरों को तत्काल प्रभाव से सर्वेक्षण कर यथाशीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है, ताकि किसानों को हुए नुकसान की भरपाई हो सके इसके बाद अब तहसीलदारों ने पटवारियों को गिरदावरी के निर्देश दिए है। बाड़मेर तहसील में बेमौसम बारिश से सर्वाधिक नुकसान हुआ है<br><br>डूगेरो का तला पंचायत समिति क्षेत्र के हाथीतला आरआई क्षेत्र में हाथीतला, डूगेरो का तला, कगाऊ, सनावड़ा, मूढ़ों का तला, जाखड़ों की ढाणी, रामदेरिया, गरल सहित कई गांवों में 18-19 मार्च की रात को आई तूफानी बारिश से रबी को जबरदस्त नुकसान हुआ। इसके बाद दैनिक भास्कर बर्बादी के मंजर में डूबे किसानों के दर्द को जाना था और खबर प्रकाशित की थी इसके बाद शनिवार को बाड़मेर एसडीएम यशार्थ शर्मा, तहसीलदार हुक्मीचंद सहित आरआई, पटवारी मौजूद रहे<br><br>हाथीतला के पीड़ित किसान खेराजराम पुत्र उदाराम के खेत में पहुंचे, जहां 7 हेक्टेयर की ईसबगोल की फसल पूरी तरह से खराब हुई नजर आई किसान ने पहली बार ही फसल बुवाई थी और करीब 10 लाख का कर्जा लिया था। नया ट्यूबवैल कर पहली खेती में ही किसान को बारिश ने बर्बाद कर दिया। इस तरह का नुकसान बाड़मेर जिलेभर में हुआ है तहसीलदार हुक्मीचंद ने कहा कि हमने सभी पटवारियों को विशेष गिरदावरी के लिए निर्देशित किया है</p>
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		<title>📰 राज्यवार सीट शेयरिंग को लेकर सियासी खींचतान तेज, गठबंधन में बढ़ा सस्पेंस</title>
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		<dc:creator><![CDATA[dhurvanews@gmail.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Jan 2026 17:52:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली:देश की राजनीति में इन दिनों राज्यवार सीट शेयरिंग को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। आगामी चुनावों से पहले गठबंधन में शामिल दलों के बीच यह तय करना चुनौती बन गया है कि किस राज्य में कौन-सी पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। सूत्रों के अनुसार, कई राज्यों में क्षेत्रीय दल अपनी [&#8230;]]]></description>
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<p>नई दिल्ली:<br>देश की राजनीति में इन दिनों राज्यवार सीट शेयरिंग को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। आगामी चुनावों से पहले गठबंधन में शामिल दलों के बीच यह तय करना चुनौती बन गया है कि किस राज्य में कौन-सी पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी।</p>



<p><br>सूत्रों के अनुसार, कई राज्यों में क्षेत्रीय दल अपनी मजबूत पकड़ का हवाला देते हुए ज़्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय दल संतुलन बनाए रखने की कोशिश में जुटे हैं। इसी को लेकर नेताओं के बयान और जवाबी बयान सामने आ रहे हैं, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।</p>



<p><br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f525.png" alt="🔥" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> क्यों चर्चा में है सीट शेयरिंग?<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f5f3.png" alt="🗳" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक समीकरण<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f91d.png" alt="🤝" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> गठबंधन सहयोगियों के बीच मतभेद<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f399.png" alt="🎙" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> बड़े नेताओं के सार्वजनिक बयान<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f4fa.png" alt="📺" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> टीवी डिबेट और सोशल मीडिया पर बहस</p>



<p><br>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर समय रहते सीट शेयरिंग पर सहमति नहीं बनी, तो इसका सीधा असर चुनावी रणनीति और वोट ट्रांसफर पर पड़ सकता है। वहीं, समझौते की स्थिति में गठबंधन को मजबूती मिलने की संभावना है।</p>



<p><br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f4cc.png" alt="📌" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> जनता पर असर<br>आम मतदाता अब यह देख रहा है कि पार्टियां सिर्फ सत्ता की गणित पर ध्यान देंगी या स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देंगी। सीट शेयरिंग का फैसला यह भी तय करेगा कि चुनाव में कौन-सा गठबंधन कितना मजबूत दिखाई देगा।</p>



<p><br>निष्कर्ष:<br>राज्यवार सीट शेयरिंग को लेकर चल रही खींचतान आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि गठबंधन में समझौता होता है या सियासी दूरी बढ़ती है।</p>
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		<title>🗳️📱 “चुनावी साल में सोशल मीडिया और राजनीति: सच, प्रचार और जनता”</title>
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		<dc:creator><![CDATA[dhurvanews@gmail.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 Jan 2026 04:56:48 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[National News]]></category>
		<category><![CDATA[चुनावी साल]]></category>
		<category><![CDATA[प्रचार और जनता]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[सच]]></category>
		<category><![CDATA[सोशल मीडिया]]></category>
		<category><![CDATA[सोशल मीडिया और राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[(Dhruva News Special Analysis) 🔎 भूमिका चुनावी साल आते ही राजनीति सिर्फ रैलियों और संसद तक सीमित नहीं रहती।असल लड़ाई अब सोशल मीडिया की स्क्रीन पर लड़ी जा रही है —जहाँ हर वीडियो, हर बयान और हर ट्रेंड वोट को प्रभावित करने की ताकत रखता है। 📱 सोशल मीडिया: नया चुनावी मैदान आज नेता सीधे [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<h6 class="wp-block-heading"><em>(Dhruva News Special Analysis)</em></h6>



<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity"/>



<h3 class="wp-block-heading"><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f50e.png" alt="🔎" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> भूमिका</h3>



<p>चुनावी साल आते ही राजनीति सिर्फ रैलियों और संसद तक सीमित नहीं रहती।<br>असल लड़ाई अब <strong>सोशल मीडिया की स्क्रीन</strong> पर लड़ी जा रही है —<br>जहाँ हर वीडियो, हर बयान और हर ट्रेंड वोट को प्रभावित करने की ताकत रखता है।</p>



<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity"/>



<h3 class="wp-block-heading"><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f4f1.png" alt="📱" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> सोशल मीडिया: नया चुनावी मैदान</h3>



<p>आज नेता सीधे जनता से नहीं, बल्कि</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>वायरल क्लिप</li>



<li>कटे-फटे वीडियो</li>



<li>इमोशनल पोस्ट</li>



<li>ट्रेंडिंग हैशटैग</li>
</ul>



<p>के ज़रिए बात कर रहे हैं।</p>



<p>समस्या ये नहीं कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल हो रहा है,<br><strong>समस्या ये है कि सच और झूठ की लाइन धुंधली होती जा रही है।</strong></p>



<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity"/>



<h3 class="wp-block-heading"><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/26a0.png" alt="⚠" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> वायरल राजनीति का खतरा</h3>



<ul class="wp-block-list">
<li>आधा वीडियो, पूरा गुस्सा</li>



<li>बिना जांच, बिना संदर्भ</li>



<li>एजेंडा सेट करने वाली पोस्ट</li>
</ul>



<p>एक बयान को इस तरह पेश किया जाता है कि<br>जनता सोचने से पहले रिएक्ट कर दे।</p>



<p><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f449.png" alt="👉" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> <strong>नतीजा:</strong><br>बहस मुद्दों पर नहीं,<br>व्यक्ति और भावना पर होने लगती है।</p>



<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity"/>



<h3 class="wp-block-heading"><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f5f3.png" alt="🗳" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> चुनाव और धारणा की राजनीति</h3>



<p>आज चुनाव विकास बनाम विकास नहीं,<br><strong>धारणा बनाम धारणा</strong> बन चुका है।</p>



<p>जो ज़्यादा वायरल —<br>वही ज़्यादा सही माना जा रहा है।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>बेरोजगारी पर सवाल? ट्रेंड दबा दो</li>



<li>महंगाई पर चर्चा? नया विवाद उछाल दो</li>
</ul>



<p>यही आज की चुनावी रणनीति बनती जा रही है।</p>



<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity"/>



<h3 class="wp-block-heading"><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/2753.png" alt="❓" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> जनता कहां खड़ी है?</h3>



<p>सबसे बड़ा सवाल —<br><strong>क्या जनता सिर्फ दर्शक बन गई है?</strong></p>



<p>या फिर<br>वह अब भी सवाल पूछेगी:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>नौकरी कहाँ है?</li>



<li>महंगाई क्यों बढ़ रही है?</li>



<li>शिक्षा और स्वास्थ्य का क्या?</li>
</ul>



<p>अगर सवाल नहीं पूछे गए,<br>तो ट्रेंड ही लोकतंत्र तय करेगा।</p>



<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity"/>



<h3 class="wp-block-heading"><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f9ed.png" alt="🧭" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> Dhruva News का स्टैंड</h3>



<p>Dhruva News न ट्रेंड से डरता है,<br>न एजेंडा से चलता है।</p>



<p>हमारा मकसद है:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>वायरल से पहले <strong>वेरिफिकेशन</strong></li>



<li>शोर से पहले <strong>तथ्य</strong></li>



<li>भावना से पहले <strong>सवाल</strong></li>
</ul>



<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity"/>



<h3 class="wp-block-heading"><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f4dd.png" alt="📝" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> निष्कर्ष</h3>



<p>सोशल मीडिया ताकत है,<br>लेकिन बिना समझ के इस्तेमाल — खतरा।</p>



<p>चुनाव लोकतंत्र का त्योहार है,<br>इसे <strong>वायरल मैनेजमेंट</strong> नहीं बनने देना होगा।</p>



<p><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f4e2.png" alt="📢" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> <strong>सोचिए, समझिए, सवाल पूछिए —<br>क्योंकि लोकतंत्र ट्रेंड से नहीं, जनता से चलता है।</strong></p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>ईरान में इंटरनेट शटडाउन अब 192 घंटे से अधिक: विरोध प्रदर्शन जारी, देश डिटेक्टिव मोड में</title>
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		<dc:creator><![CDATA[dhurvanews@gmail.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Jan 2026 12:52:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[World News]]></category>
		<category><![CDATA[ईरान]]></category>
		<category><![CDATA[ईरान में इंटरनेट शटडाउन]]></category>
		<category><![CDATA[विरोध प्रदर्शन जारी]]></category>
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					<description><![CDATA[ईरान में इंटरनेट शटडाउन अब 192 घंटे से अधिक: विरोध प्रदर्शन जारी, देश डिटेक्टिव मोड में तेहरान, 17 जनवरी 2026 — ईरान में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के बीच देश में लागू इंटरनेट शटडाउन अब लगभग 192 घंटे (लगभग 8 दिन) से ज्यादा समय तक जारी है, जिससे जनता का दुनिया से संपर्क लगभग टूट सा गया [&#8230;]]]></description>
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<h5 class="wp-block-heading"><strong>ईरान में इंटरनेट शटडाउन अब 192 घंटे से अधिक: विरोध प्रदर्शन जारी, देश डिटेक्टिव मोड में</strong></h5>



<p><strong>तेहरान, 17 जनवरी 2026</strong> — ईरान में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के बीच देश में लागू <em>इंटरनेट शटडाउन</em> अब लगभग <strong>192 घंटे (लगभग 8 दिन)</strong> से ज्यादा समय तक जारी है, जिससे जनता का दुनिया से संपर्क लगभग टूट सा गया है। देश की जनता इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाओं के बिना लगभग ‘डिजिटल अँधेरे’ में जीवन व्यतीत कर रही है।</p>



<p>ईरानी अधिकारियों ने <strong>8 जनवरी 2026</strong> की रात को देशव्यापी इंटरनेट और बाहरी फोन कनेक्टिविटी को लगभग पूर्ण रूप से बंद कर दिया था। इंटरनेट मॉनिटरिंग समूहों जैसे Cloudflare Radar और NetBlocks के आंकड़ों के अनुसार, इंटरनेट ट्रैफिक लगभग <em>0-2%</em> के बीच रह गया, जिससे देश विश्व से लगभग कट गया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>क्या हो रहा है और क्यों?</strong></h3>



<p>प्रदर्शन कई शहरों में आर्थिक कठिनाइयों, बेरोज़गारी और राजनीतिक असंतोष के कारण शुरू हुए थे। ईरानी सरकार ने इन प्रदर्शनों को रोकने और बाहर तक खबर पहुँचने को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं, जिसमें <em>आंतरिक इंटरनेट नेटवर्क तक सीमित रखकर बाहरी कनेक्शन काटना</em> भी शामिल है।</p>



<p>सरकार का दावा है कि यह कदम “सुरक्षा सुनिश्चित करने और देश को अस्थिरता से बचाने” के लिए आवश्यक था। हालांकि लोगों से संपर्क कटने के कारण परिवार और मित्र विदेशों में अपने परिजनों से माहों से कोई सीधी बात नहीं कर पा रहे हैं। </p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>लोगों की जिंदगी कितनी प्रभावित हुई?</strong></h3>



<p>देश में इंटरनेट बंद रहने से:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>बैंकिंग, शिक्षा, व्यापार और स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा</strong> आई है। </li>



<li>कई लोग <em>VPN या Starlink</em> जैसे सैटेलाइट इंटरनेट के विकल्पों को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं, मगर इसे भी भारी रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है। </li>



<li>विरोध प्रदर्शन अब भी जारी हैं, और सड़कों पर हजारों लोग अपनी मांगों के साथ जुटे हुए हैं। </li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया</strong></h3>



<p>इंटरनेट ब्लैकआउट और विरोध प्रदर्शनों पर आलोचना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है। कई मानवीय और डिजिटल अधिकार समूह इसे <em>सूचना का दमन</em> और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन बता रहे हैं, क्योंकि इससे मीडिया कवरेज और वास्तविक घटनाओं का बाहर तक प्रसारण मुश्किल हो रहा है। </p>



<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity"/>



<p><strong>संक्षेप में:</strong><br>ईरान में इंटरनेट शटडाउन अब 192 घंटे से अधिक समय तक जारी है, जिसमें देश जल रहा है — लोगों का दुनिया से संपर्क टूटता जा रहा है, प्रदर्शन फिर भी तेज़ हैं और सरकार ने सख्ती दिखाने के साथ बाहरी नेटवर्क को बंद रखा है।</p>



<p></p>
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		<title>📰 ब्रेकिंग: ट्रंप ने मध्यस्थता की पेशकश से तनाव में गिरावट की उम्मीद</title>
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		<dc:creator><![CDATA[dhurvanews@gmail.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Jan 2026 09:37:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[World News]]></category>
		<category><![CDATA[ट्रंप]]></category>
		<category><![CDATA[ट्रंप ने मध्यस्थता की]]></category>
		<category><![CDATA[ट्रंप ने मध्यस्थता की पेशकश]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय राजनीति के हलचलों में आज एक बड़ा मोड़ आया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिस्र और इथियोपिया के बीच पानी के बंटवारे को लेकर विवाद के समाधान में मध्यस्थता की पेशकश कर दी है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम क्षेत्रीय तनाव को कम करने और दोनों देशों के [&#8230;]]]></description>
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<p>नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय राजनीति के हलचलों में आज एक बड़ा मोड़ आया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिस्र और इथियोपिया के बीच पानी के बंटवारे को लेकर विवाद के समाधान में मध्यस्थता की पेशकश कर दी है।<br>विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम क्षेत्रीय तनाव को कम करने और दोनों देशों के बीच बातचीत को पुनः सक्रिय करने में मदद कर सकता है। </p>



<p><br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f4cc.png" alt="📌" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> क्या है पूरा मामला? <br>मिस्र और इथियोपिया के बीच नील नदी के पानी के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद जारी है।<br>मिस्र का कहना है कि नदी का पानी उसके कृषि और जल स्रोत के लिए ज़िंदगी की तरह है।<br>वहीं, इथियोपिया नैशनल वॉल्यूम बढ़ाने और बिजली उत्पादन के लिए परियोजनाएँ बना रहा है।<br>भारत समेत कई देशों ने इस मुद्दे पर गौर किया है क्योंकि इससे क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ सकता है।<br>अब ट्रंप की मध्यस्थता पेशकश से संभावित रूप से बातचीत का मार्ग खुल सकता है।</p>



<p><br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f30d.png" alt="🌍" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया<br>विश्लेषकों का कहना है कि इस पहल से<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/2714.png" alt="✔" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> तनाव कम होने के संकेत<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/2714.png" alt="✔" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> कूटनीति को बढ़ावा<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/2714.png" alt="✔" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> योगदान देने वाली दुनिया की बड़ी शक्तियों का ध्यान इस दिशा में लग सकता है</p>
]]></content:encoded>
					
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