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	<title>National News &#8211; Dhurva News</title>
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	<description>सच का एक ही नाम ध्रुवा न्यूज</description>
	<lastBuildDate>Wed, 30 Sep 2026 16:57:48 +0000</lastBuildDate>
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		<title>EWS सरलीकरण की चिंगारी को आवाज दे रहे रविंद्र सिंह भाटी, आखिर मुद्दा इतना बड़ा क्यों है?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dhurva News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 30 Sep 2026 05:16:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Local News]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
		<category><![CDATA[World News]]></category>
		<category><![CDATA[EWS]]></category>
		<category><![CDATA[EWS Yatra]]></category>
		<category><![CDATA[Ravindra Singh Bhati]]></category>
		<category><![CDATA[राजस्थान में बड़ा मुद्दा]]></category>
		<category><![CDATA[सरलीकरण की मांग क्यों बनी]]></category>
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					<description><![CDATA[बाड़मेर/जयपुर। राजस्थान में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS से जुड़े नियमों के सरलीकरण का मुद्दा अब सरकारी प्रक्रियाओं से निकलकर सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने EWS व्यवस्था में बदलाव और प्रक्रियाओं को आसान बनाने की मांग को लेकर प्रदेशव्यापी जन-संवाद यात्रा [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">बाड़मेर/जयपुर। राजस्थान में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS से जुड़े नियमों के सरलीकरण का मुद्दा अब सरकारी प्रक्रियाओं से निकलकर सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने EWS व्यवस्था में बदलाव और प्रक्रियाओं को आसान बनाने की मांग को लेकर प्रदेशव्यापी जन-संवाद यात्रा शुरू की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भाटी की मांगों में EWS पात्रता के लिए जमीन से जुड़े मानदंडों की समीक्षा, प्रमाण-पत्र की वैधता बढ़ाना, आय निर्धारण प्रक्रिया को सरल करना और राजस्थान में जारी EWS प्रमाण-पत्र को केंद्रीय सेवाओं व केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में मान्यता देने जैसे मुद्दे शामिल हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आखिर जमीन का नियम इतना महत्वपूर्ण क्यों?केंद्रीय EWS व्यवस्था में परिवार की सकल वार्षिक आय ₹8 लाख से कम होना एक प्रमुख शर्त है। लेकिन इसके साथ संपत्ति संबंधी मानदंड भी लागू हैं। केंद्र सरकार के अनुसार, पांच एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि रखने वाला परिवार आय सीमा के भीतर होने के बावजूद केंद्रीय EWS पात्रता से बाहर हो सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यहीं से पश्चिमी राजस्थान जैसे क्षेत्रों में बहस का एक प्रमुख बिंदु सामने आता है।एक ही रकबे की जमीन की आर्थिक उपयोगिता हर क्षेत्र में समान नहीं होती। सिंचाई, वर्षा, मिट्टी की उत्पादकता, स्थानीय भूमि मूल्य और कृषि से होने वाली वास्तविक आय जैसे कारक किसी परिवार की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।भाटी इसी आधार पर जमीन के केवल क्षेत्रफल के बजाय उसकी उत्पादकता और आर्थिक उपयोगिता को भी पात्रता निर्धारण में शामिल करने की मांग कर रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> प्रमाण-पत्र की वैधता बढ़ाने की मांगभाटी ने EWS प्रमाण-पत्र की वर्तमान प्रक्रिया को भी सरल बनाने की मांग उठाई है। उनकी मांग है कि प्रमाण-पत्र की वैधता तीन से पांच वर्ष तक बढ़ाने पर विचार किया जाए, ताकि पात्र परिवारों को बार-बार दस्तावेजी प्रक्रिया से न गुजरना पड़े।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राजस्थान सरकार की वेबसाइट पर राज्य और केंद्र—दोनों के लिए EWS Income &amp; Asset Certificate की अलग-अलग सेवाएं उपलब्ध हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">केंद्र में राज्य के EWS प्रमाण-पत्र की मान्यताअभियान का एक प्रमुख हिस्सा यह मांग भी है कि राजस्थान सरकार द्वारा जारी EWS प्रमाण-पत्र को केंद्रीय सेवाओं और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में भी मान्यता मिले।इसका उद्देश्य अलग-अलग स्तर पर प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया को कम करना बताया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं से भी जुड़ा मुद्दा EWS बहस केवल आरक्षण तक सीमित नहीं है। भाटी ने प्रतियोगी परीक्षाओं में EWS अभ्यर्थियों के लिए आयु सीमा और आवेदन शुल्क में उचित राहत, EWS विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति और छात्रावास जैसी सुविधाओं की भी मांग रखी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यही वजह है कि इस मुद्दे का सीधा संबंध प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं, विद्यार्थियों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से बनता है।75 से ज्यादा विधायकों के समर्थन का दावाभाटी की ओर से दावा किया गया है कि पक्ष और विपक्ष के 75 से अधिक विधायकों ने EWS सरलीकरण की मांग के समर्थन में पत्र दिए हैं। इस संख्या और समर्थन की स्वतंत्र पुष्टि अलग से किए जाने की जरूरत है; फिलहाल यह भाटी द्वारा बताया गया दावा है </p>



<p class="wp-block-paragraph">अब सबसे बड़ा सवाल सरकार के जवाब काइस अभियान के बीच केंद्र सरकार का मौजूदा रुख भी महत्वपूर्ण है। 5 अगस्त 2026 को लोकसभा में दिए गए जवाब के अनुसार, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने कहा था कि मौजूदा EWS आरक्षण प्रावधानों में संशोधन का कोई प्रस्ताव उसके पास विचाराधीन नहीं है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसलिए अब राजस्थान में उठ रही मांगों और केंद्र के मौजूदा रुख के बीच आगे की राजनीतिक एवं प्रशासनिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।क्या EWS मुद्दा राजनीतिक रूप ले सकता है?इसे लेकर अभी किसी नए वोट बैंक के बनने या किसी राजनीतिक दल के वोट बैंक पर प्रभाव पड़ने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। इसके लिए चुनावी आंकड़ों और लंबे समय के मतदाता व्यवहार का अध्ययन जरूरी होगा।फिलहाल इतना स्पष्ट है कि रविंद्र सिंह भाटी ने EWS की तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं को सार्वजनिक बहस का विषय बनाया है। उनकी जन-संवाद यात्रा 25 सितंबर से शुरू हुई और बाड़मेर से आगे पश्चिमी राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंच रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अब सवाल यही है—कागजों में सरलीकरण होगा या जमीन पर समाधान?</p>



<p class="wp-block-paragraph"><a href="https://dhurvanews.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a5%89%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%a1%e0%a5%8b/">राजस्थान बॉर्डर पर बुलडोज़र एक्शन: बाड़मेर-जैसलमेर में अवैध कब्जों पर बड़ी कार्रवाई, सीमा सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बना चर्चा का केंद्र</a><a href="https://dhurvanews.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a5%89%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%a1%e0%a5%8b/">राजस्थान बॉर्डर पर बुलडोज़र एक्शन: बाड़मेर-जैसलमेर में अवैध कब्जों पर बड़ी कार्रवाई, सीमा सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बना चर्चा का केंद्र</a></p>
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		<title>भागी हुई लड़कियों का बाप.. सबसे निरीह होता हैं !!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dhurva News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 30 Sep 2026 04:59:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Local News]]></category>
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					<description><![CDATA[वह इस दुनिया का सबसे अधिक टूटा हुआ व्यक्ति होता है। पहले तो वह महीनों तक घर से निकलता नहीं है, और फिर जब निकलता है तो हमेशा सर झुका कर चलता है। अपने आस-पास मुस्कुराते हर चेहरों को देख कर उसे लगता है जैसे लोग उसी को देख कर हँस रहे हैं। वह जीवन [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">वह इस दुनिया का सबसे अधिक टूटा हुआ व्यक्ति होता है। पहले तो वह महीनों तक घर से निकलता नहीं है, और फिर जब निकलता है तो हमेशा सर झुका कर चलता है। अपने आस-पास मुस्कुराते हर चेहरों को देख कर उसे लगता है जैसे लोग उसी को देख कर हँस रहे हैं। वह जीवन भर किसी से तेज स्वर में बात नहीं करता, वह डरता है कि कहीं कोई उसकी भागी हुई बेटी का नाम न ले ले&#8230; वह जीवन भर डरा रहता है। वह रोज मरता है। तबतक मरता है जबतक कि मर नहीं जाता।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="1024" src="https://dhurvanews.com/wp-content/uploads/2026/09/368765-1-1024x1024.png" alt="" class="wp-image-3726" srcset="https://dhurvanews.com/wp-content/uploads/2026/09/368765-1-1024x1024.png 1024w, https://dhurvanews.com/wp-content/uploads/2026/09/368765-1-300x300.png 300w, https://dhurvanews.com/wp-content/uploads/2026/09/368765-1-150x150.png 150w, https://dhurvanews.com/wp-content/uploads/2026/09/368765-1-768x768.png 768w, https://dhurvanews.com/wp-content/uploads/2026/09/368765-1-96x96.png 96w, https://dhurvanews.com/wp-content/uploads/2026/09/368765-1.png 1254w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">पुराने दिनों में एक शब्द होता था &#8216;मोछ-भदरा&#8217;। जिस पिता की बेटी घर से भाग जाती थी, उसे उसी दिन हजाम के यहाँ जा कर अपनी मूछें मुड़वा लेनी पड़ती थी। यह ग्रामीण सभ्यता का अलिखित संविधान था। तब मनई दो बार ही मूँछ मुड़ाता था, एक पिता की मृत्यु पर और दूसरा बेटी के भागने पर। बेटी का भागना तब पिता की मृत्यु से अधिक पीड़ादायक समझा जाता था। तब और अब में बस इतना इतना ही अंतर है कि अब पिता मूँछ नहीं मुड़ाता, पर मोछ-भदरा तब भी बन जाता है। बिना मूँछ मुड़ाये&#8230;</p>



<p class="wp-block-paragraph">किसी के &#8220;फेर&#8221; में फँस कर घर से भागते बच्चे( लड़के और लड़कियाँ दोनों) यह नहीं जानते कि दरअसल वे अपने पिता की प्रतिष्ठा के मुह में मूत्र कर जा रहे हैं। निरीह पिता का मुख जीवन भर उस &#8216;मूत्र&#8217; के कड़वे स्वाद से गजबजाया रहता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वैसे एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि बेटे के भागने पर पिता कम दुखी होता है, बेटियों के भागने पर अधिक। सुनने में गलत लगता है न? भेदभाव जैसा है न यह? पर इस भेदभाव का एक बड़ा कारण है&#8230;</p>



<p class="wp-block-paragraph">जानते हैं भारतीय समाज अपनी बेटियों को ले कर इतना संवेदनशील क्यों रहा है? भारत का इतिहास पढ़िए। हर्षवर्धन के बाद तक, अर्थात सातवीं-आठवीं शताब्दी तक वसन्तोत्सव मनाए जाने के प्रमाण हैं। वसन्तोत्सव! वसन्त के दिनों में एक महीने का उत्सव, जिसमें विवाह योग्य युवक-युवतियाँ अपनी इच्छा से अपना जीवनसाथी चुनती थीं और समाज उसे पूरी प्रतिष्ठा के साथ मान्यता देता था। कितना आश्चर्यजनक है न, कि आज उसी देश में खाप पंचायतें हैं जो प्रेम करने पर मृत्युदण्ड तक देती हैं। क्यों?इस क्यों का उत्तर भी उसी इतिहास में है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारत पर आक्रमण करने वाला पहला अरबी &#8216;मोहम्मद बिन कासिम&#8217; भारत से धन के साथ और क्या लूट कर ले गया, जानते हैं? सिंधु नरेश दाहिर की दो बेटियां&#8230;</p>



<p class="wp-block-paragraph">  उसके बाद से आज तक हर आक्रमणकारी यही करता रहा है। गोरी, गजनवी, तैमूर&#8230; सबने एक साथ हजारों लाखों बेटियों का अपहरण किया। क्यों? प्रेम के लिए? नहीं! बलात्कार करने के लिए&#8230; यौन दासी बनाने के लिए&#8230; भारत ने किसी देश की बेटियों को नहीं लूटा, पर भारत की बेटियाँ सबसे अधिक लूटी गई हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कासिम से ले कर गोरी तक, खिलजी से ले कर मुगलों तक, अंग्रेजों से ले कर राँची के उस रकीबुल हसन &#8216;जिसने राष्ट्रीय निशानेबाज तारा सहदेव को लूटा&#8217; तक। सबने भारत की बेटियों को लूटा। इतना लूटा कि भारत अपनी बेटियों को सात पर्दे में छुपाने लगा। उसे अपने प्राणों से अधिक बेटियों की चिन्ता सताने लगी। वह अपनी बेटियों की ओर देखने वाली हर अच्छी/बुरी आँख से डरने लगा, और बेटियों को लोगों की दृष्टि से बचाना पिता का प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य बन गया। जो पिता अपना यह कर्तव्य नहीं निभा पाता, समाज ने उसके लिए तिरस्कार तय किया। यह तिरस्कार आज तक चल रहा है&#8230;</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारत का एक सामान्य पिता अपनी बेटी के प्रेम से नहीं डरता, वह अपनी बेटी के लूटे जाने से डरता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भागी हुई लड़कियों के समर्थन में खड़े होने वालों का गैंग अपने हजार विमर्शों में एक बार भी इस मुद्दे पर बोलना नहीं चाहता कि भागने के साल भर बाद ही लड़की के प्रति उस हवस के भाव &#8216;जिसे लड़की प्रेम समझ बैठी थी&#8217; के शिथिल होने पर उसका कथित प्रेमी अपने दोस्तों से उसका बलात्कार क्यों करवाता है, उसे कोठे पर क्यों बेंच देता है, या उसे अरब देशों में लड़की सप्लाई करने वालों के हाथ क्यों बेंच देता है। आश्चर्यजनक लग रहा है न? पर यह सच्चाई है मित्र, कि देश के हर रेडलाइट एरिया में मर रही लड़कियाँ प्रेम के नाम ही फँसाई जाती हैं। उन लड़कियों पर, उस &#8220;धूर्त प्रेम&#8221; पर कभी कोई चर्चा नहीं होती। उनके लिए कोई मानवाधिकारवादी, कोई स्त्रीवादी, विमर्श नहीं छेड़ता।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यही प्रेम का सच है, यही भागी हुई लड़कियों का सच है। प्रेम के नाम पर &#8220;पट&#8221; जाने वाली मासूम लड़कियाँ नहीं जानतीं कि वे अपने लिए और अपने पिता के लिए कैसा अथाह दुःख खरीद रही हैं। समझता है उनका निरीह पिता.</p>



<p class="wp-block-paragraph">भागी हुई लड़कियों का पिता त्रइस सृष्टि का सबसे निरीह पुरुष होता है !!!</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>राजस्थान बॉर्डर पर बुलडोज़र एक्शन: बाड़मेर-जैसलमेर में अवैध कब्जों पर बड़ी कार्रवाई, सीमा सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बना चर्चा का केंद्र</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dhurva News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 07:15:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Local News]]></category>
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					<description><![CDATA[बाड़मेर/जैसलमेर &#124; धुर्वा न्यूज़ विशेष राजस्थान के सीमावर्ती जिलों बाड़मेर और जैसलमेर में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ चल रही प्रशासनिक कार्रवाई ने पूरे प्रदेश में बहस छेड़ दी है। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों में चल रहे इस अभियान के दौरान कई अवैध निर्माण हटाए गए हैं। प्रशासन के अनुसार, इनमें [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>बाड़मेर/जैसलमेर | धुर्वा न्यूज़ विशेष</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">राजस्थान के सीमावर्ती जिलों <strong>बाड़मेर और जैसलमेर</strong> में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ चल रही प्रशासनिक कार्रवाई ने पूरे प्रदेश में बहस छेड़ दी है। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों में चल रहे इस अभियान के दौरान कई अवैध निर्माण हटाए गए हैं। प्रशासन के अनुसार, इनमें कुछ ऐसे धार्मिक ढांचे भी शामिल हैं जो सरकारी भूमि पर बिना वैध अनुमति बने पाए गए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक तीखी चर्चा देखने को मिल रही है। समर्थक इसे <strong>कानून का समान अनुपालन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम</strong> बता रहे हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि प्रत्येक मामले में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिए।</p>



<h2 class="wp-block-heading">सीमा सुरक्षा क्यों बनी प्राथमिकता?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">प्रशासन का कहना है कि भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर अनधिकृत निर्माण सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन सकते हैं। इसी कारण सर्वे के बाद चिन्हित अतिक्रमणों के विरुद्ध चरणबद्ध कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित पक्षों को नोटिस देने और कानूनी प्रक्रिया अपनाने के बाद ही कार्रवाई की जा रही है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">किन इलाकों में हुई कार्रवाई?</h2>



<p class="has-medium-font-size wp-block-paragraph">बाड़मेर के <strong>गडरा रोड, सेड़वा और रामसर</strong> तथा जैसलमेर के <strong>नाचना</strong> सहित कई सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासन ने अवैध कब्जे हटाने का अभियान चलाया है। प्रशासन का दावा है कि कार्रवाई सरकारी रिकॉर्ड और भूमि अभिलेखों के आधार पर की गई।</p>



<h2 class="wp-block-heading">राजनीतिक बयानबाजी तेज</h2>



<p class="wp-block-paragraph">कार्रवाई के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। विपक्ष ने कार्रवाई की प्रक्रिया और चयन के मानदंडों पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार का कहना है कि <strong>कानून की नजर में सभी समान हैं</strong> और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी व्यक्ति या संस्था का हो, नियमों के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।</p>



<h2 class="wp-block-heading">स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया</h2>



<p class="wp-block-paragraph">कुछ स्थानीय निवासियों और धार्मिक संस्थाओं ने दावा किया है कि कुछ ढांचे वर्षों से मौजूद थे और उनके ऐतिहासिक महत्व की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिनके पास वैध दस्तावेज हैं, उन्हें कानून के अनुसार पूरा अवसर दिया जाएगा।</p>



<h2 class="wp-block-heading">आगे क्या?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार सीमावर्ती क्षेत्रों में सर्वे और सत्यापन का कार्य जारी है। यदि सरकारी भूमि पर अन्य अवैध कब्जे पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह अभियान और व्यापक हो सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">निष्कर्ष</h2>



<p class="wp-block-paragraph">बाड़मेर और जैसलमेर में चल रही यह कार्रवाई अब केवल अतिक्रमण हटाने का मामला नहीं रह गई है। यह <strong>राष्ट्रीय सुरक्षा, सरकारी भूमि के संरक्षण, कानून के समान अनुपालन और स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था</strong> से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। अंतिम निर्णय प्रत्येक मामले में उपलब्ध दस्तावेजों, प्रशासनिक रिकॉर्ड और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।</p>
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		<title>डा.मुकेश जैन को मिला राष्ट्रीय सेवा योजना का राज्य स्तरीय पुरस्कार,उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने किया सम्मानित</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dhurva News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 12:59:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Local News]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
		<category><![CDATA[World News]]></category>
		<category><![CDATA[Barmer]]></category>
		<category><![CDATA[Indian politics today]]></category>
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					<description><![CDATA[राजकीय महाविद्यालय बाड़मेर मे़ पदस्थापित असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मुकेश जैन को सत्र 2024-25 के लिए राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी के रूप में उल्लेखनीय सेवाओं के लिए राष्ट्रीय सेवा योजना के राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्राचार्य डॉ. मृणाली चौहान ने बताया कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय अजमेर में आयुक्तालय कॉलेज [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"></p>



<p class="wp-block-paragraph"><br><br>राजकीय महाविद्यालय बाड़मेर मे़ पदस्थापित असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मुकेश जैन को सत्र 2024-25 के लिए राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी के रूप में उल्लेखनीय सेवाओं के लिए राष्ट्रीय सेवा योजना के राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्राचार्य डॉ. मृणाली चौहान ने बताया कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय अजमेर में आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा राजस्थान जयपुर की ओर से आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना के राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह में उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने सत्र 2024-25 के लिए एन एस एस के उत्कृष्ट कार्यक्रम अधिकारी का राज्य स्तरीय पुरस्कार सहायक आचार्य डॉ. मुकेश जैन को प्रदान किया इस अवसर पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, कॉलेज शिक्षा राजस्थान के संयुक्त निदेशक अकादमिक विजयसिंह जाट, एन एस एस के क्षेत्रीय निदेशक एस पी भटनागर, एन एस एस के राज्य समन्वयक कृष्ण कुमार कुमावत भी उपस्थित रहे। प्राचार्य डॉ. मृणाली चौहान ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि एनएसएस स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम अधिकारी डॉ. मुकेश जैन के निर्देशन में ने सामाजिक जिम्मेदारी, सेवा भावना और राष्ट्र निर्माण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए हैं उल्लेखनीय है कि सत्र 2024-25 के दौरान स्वच्छता अभियान,आरडी परेड, वृक्षारोपण, नशामुक्ति अभियान, मतदाता एवं उपभोक्ता जागरूकता, लैंगिक संवेदनशीलता, फायर सेफ्टी, आपदा प्रबंधन, नागरिक सुरक्षा एवं साइबर सुरक्षा जैसे विषयों पर कार्यशालाओं, नाट्य प्रशिक्षण शिविरों और जन-जागरूकता कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया इन गतिविधियों ने विद्यार्थियों के साथ-साथ स्थानीय समुदाय में भी व्यापक सामाजिक चेतना का संचार किया। साथ ही सामाजिक, सांस्कृतिक एवं खेलकूद गतिविधियों में भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया कार्यक्रम अधिकारी वीरसिंह भाटी के अनुसार डॉ. मुकेश जैन को एन एस एस गतिविधियों के समयबद्ध कार्य निष्पादन, गतिविधियों के सफल संचालन एवं उपलब्धियों के आधार पर राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए निर्धारित चयन प्रक्रिया के जरिए चुना गया। कार्यक्रम अधिकारी अरविंद कुमार के अनुसार एनएसएस स्वयंसेवकों ने डॉ. मुकेश जैन के निर्देशन में राष्ट्रीय एकता शिविर, यूथ पार्लियामेंट, यातायात प्रशिक्षण शिविर, नशा मुक्ति कार्यक्रम तथा स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों में भी सक्रिय भागीदारी निभाई पुरस्कार प्राप्ति पर डॉ. मुकेश जैन ने इस सम्मान को एनएसएस स्वयंसेवकों को समर्पित करते हुए कहा कि युवाओं में सेवा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का भाव विकसित करना ही एनएसएस का मूल उद्देश्य है</p>
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		<title>ईरान संकट का असर: अब 14.2 किलो के सिलेंडर में मिलेगी केवल 10 किलो गैस! OMCs की नई रणनीति</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dhurva News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 09:32:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Local News]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
		<category><![CDATA[World News]]></category>
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		<category><![CDATA[gas]]></category>
		<category><![CDATA[Iran War]]></category>
		<category><![CDATA[LPG]]></category>
		<category><![CDATA[War]]></category>
		<category><![CDATA[ईरान संकट]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली &#124; 23 मार्च, 2026 अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने भारत की रसोई के बजट और आपूर्ति श्रृंखला को हिला कर रख दिया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बाधित होने के कारण भारत में एलपीजी (LPG) के आयात में भारी गिरावट आई है। देश [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><br>नई दिल्ली | 23 मार्च, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br>अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने भारत की रसोई के बजट और आपूर्ति श्रृंखला को हिला कर रख दिया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बाधित होने के कारण भारत में एलपीजी (LPG) के आयात में भारी गिरावट आई है। देश में खाना पकाने वाली गैस के घटते स्टॉक को देखते हुए सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) अब एक अभूतपूर्व कदम उठाने पर विचार कर रही हैं।<br>क्या है नया प्रस्ताव?</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br>मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, तेल कंपनियां अब घरों में इस्तेमाल होने वाले मानक 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर को पूरी तरह भरने के बजाय, उसमें केवल 10 किलोग्राम गैस भरकर सप्लाई करने की योजना बना रही हैं।<br>रणनीति के पीछे का मुख्य उद्देश्य<br>इस कदम का मुख्य लक्ष्य &#8220;राशनिंग&#8221; के जरिए उपलब्ध गैस को अधिक से अधिक परिवारों तक पहुँचाना है।<br> </p>



<p class="wp-block-paragraph"> समान वितरण: 14.2 किलो का एक सिलेंडर औसतन 35-40 दिन चलता है। यदि इसमें 10 किलो गैस दी जाती है, तो यह लगभग 25-30 दिन चलेगा, जिससे कम स्टॉक में भी ज्यादा उपभोक्ताओं को रिफिल मिल सकेगी।<br> * पैनिक बुकिंग पर रोक: स्टॉक कम होने की खबरों के बीच लोग &#8216;पैनिक बुकिंग&#8217; कर रहे हैं। कम मात्रा की सप्लाई से सरकार इस स्थिति को नियंत्रित करना चाहती है।<br> </p>



<p class="wp-block-paragraph"> कीमतों में राहत: रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ताओं से केवल 10 किलो गैस की ही कीमत वसूली जाएगी, जिससे प्रति सिलेंडर तत्काल खर्च कम हो सकता है।<br>हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है महत्वपूर्ण?</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br>भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60% आयात करता है, और इस आयात का करीब 90% हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। यह सभी जहाज &#8216;हॉर्मुज जलडमरूमध्य&#8217; के संकीर्ण रास्ते से होकर गुजरते हैं। ईरान और अमेरिका के युद्ध ने इस मार्ग को असुरक्षित बना दिया है, जिससे भारत आने वाले कई गैस टैंकर या तो फंसे हुए हैं या उन्हें लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।<br>चुनौतियां और कार्यान्वयन</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br>हालांकि यह योजना कागजों पर प्रभावी दिख रही है, लेकिन इसे लागू करना आसान नहीं होगा:<br>  सॉफ्टवेयर और वेटिंग सिस्टम: बॉटलिंग प्लांट में मशीनों को 10 किलो वजन के लिए फिर से री-कैलिब्रेट करना होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br>  कानूनी प्रक्रिया: वजन और माप विभाग से इसके लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होगी।<br>  वितरण लागत: सिलेंडर की संख्या बढ़ने से वितरकों (Distributors) की डिलीवरी लागत बढ़ सकती है।<br>पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, यदि अगले कुछ दिनों में खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति सामान्य नहीं होती है, तो इस &#8217;10 किलोग्राम फॉर्मूले&#8217; को जल्द ही पूरे देश में लागू किया जा सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>रेगिस्तान में दम तोड़ता जल जीवन मिशन बाड़मेर-बालोतरा के हजारों गांवों में नलों से आ रहा ‘जहरीला’ पानी, 5 साल में सिर्फ 21% काम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dhurva News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Mar 2026 07:58:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Local News]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
		<category><![CDATA[World News]]></category>
		<category><![CDATA[जल जीवन मिशन]]></category>
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					<description><![CDATA[बाड़मेर: विश्व जल दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य हर व्यक्ति तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने की जरूरत को रेखांकित करना है, लेकिन इसके विपरीत राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर और बालोतरा जैसे जिलों में हालात चिंताजनक हैं। जहां हजारों गांव-ढाणियों के लोग आज भी आर्सेनिक और फ्लोराइड युक्त पानी पीने को [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"></p>



<p class="wp-block-paragraph">बाड़मेर: <br>विश्व जल दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य हर व्यक्ति तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने की जरूरत को रेखांकित करना है, लेकिन इसके विपरीत राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर और बालोतरा जैसे जिलों में हालात चिंताजनक हैं। जहां हजारों गांव-ढाणियों के लोग आज भी आर्सेनिक और फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर हैं।जलजीवन मिशन जैसी योजनाओं के बावजूद शुद्ध पानी का सपना यहां अब भी अधूरा है। देश के 11,488 गांव-बस्तियां आज भी शुद्ध पानी को तरस रहे हैं। बाड़मेर के 5,472 और बालोतरा की 1,015 गांव ढाणी के लोग आर्सेनिक और फ्लोराइड युक्त पानी पी रहे हैं।<br><br>केंद्र सरकार ने जेजेएम के तहत इन क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति 8 से 10 लीटर प्रतिदिन गुणवत्तापूर्वक पानी पहुंचाने के निर्देश राज्य सरकार को दिए गए हैं। लेकिन अभी तक इसकी भी पालना नहीं हो पाई है। योजना के तहत देशभर में 2030 तक शुद्ध एवं गुणवत्तायुक्त पानी पहुंचाने का उद्देश्य तय किया गया है। देश में अभी तक 19.36 करोड़ परिवारों में से 15.82 करोड़ परिवारों तक हर घर नल के जरिए पानी पहुंच पाया है।<br><br>कमजोर राजनीतिक पैरवी:<br><br>साल 2019 में जलजीवन मिशन प्रारंभ होने के बाद से ही बाड़मेर-जैसलमेर और बालोतरा अंतिम स्थिति में है। कमजोर राजनीतिक पैरवी के चलते इन जिलों में योजना की प्रगति नहीं हो पाई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br>केंद्र सरकार ने यह दिए थे निर्देश:<br><br>पाइपगत जलापूर्ति योजना बनाएं<br>आर्सेनिक और फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक जलशोधन यंत्र (सीडब्ल्यूपीपी) स्थापित करें<br>प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पाइप लाइन से 8 से 10 लीटर पानी उपलब्ध करवाएं<br><br>नहीं मिला नहरी जल:<br><br>जलजीवन मिशन को लेकर बाड़मेर, जैसलमेर और बालोतरा जिला अभी फिसड्डी स्थिति में है। यहां दूर गांव ढाणियों में पानी नहीं पहुंचा है। दूरस्थ इलाका और नहरी जल की उपलब्धता नहीं होने से मिशन के तहत हर घर नल का सपना अभी भी अधूरा है।<br><br>इसलिए हैं ऐसे हालात:<br><br>बाड़मेर, जैसलमेर और बालोतरा जिले में शुद्ध पानी को लेकर नहरी परियोजनाएं तो बनी हैं, लेकिन पानी घरों तक नहीं पहुंचा। धीमी गति से चल रहे कार्य के चलते यह दिक्कत आ रही है। वहीं, पाताल का पानी भी नीचे जा पहुंचा है। इस कारण यहां लोगों को खारा पानी या अशुद्ध पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है।<br><br>रेगिस्तान में ‘जल जीवन मिशन’ हांफता, 5 साल में सिर्फ 21% प्रगति:<br><br>रेगिस्तानी बाड़मेर में बहुप्रतीक्षित जल जीवन मिशन अब धीमी रफ्तार के कारण दम तोड़ता नजर आ रहा है। पांच वर्षों से चल रही इस महत्वाकांक्षी योजना की जमीनी हकीकत यह है कि अब तक कुल लक्ष्य का महज 21.27 फीसदी ही कार्य पूरा हो सका है। ऐसे में ग्रीष्म ऋतु की दस्तक के साथ ही हजारों ग्रामीण परिवारों के सामने पेयजल संकट की आशंका गहरा गई है।योजना के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन 2,66,333 परिवारों में से अब तक केवल 58,214 घरों तक ही कनेक्शन पहुंच पाए हैं, जो करीब 21.30 प्रतिशत है। अगस्त 2019 तक यह आंकड़ा मात्र 2.35 फीसदी था, जिससे साफ है कि प्रगति अपेक्षित गति से बहुत पीछे चल रही है।<br><br>एक नजर में प्रोजेक्ट की स्थिति:<br><br>लघु योजनाएं: 82.72 करोड़, 64 गांव &#8211; वित्तीय प्रगति 44.97 करोड़, जल कनेक्शन 91.26%<br>बाड़मेर लिफ्ट परियोजना पार्ट A: 212.83 करोड़, 99 गांव &#8211; वित्तीय 144.21 करोड़, जल प्रगति 37.10%<br>पार्ट B: 155.17 करोड़, 84 गांव &#8211; वित्तीय 86.30 करोड़, जल प्रगति 44.50%<br>पार्ट C: 440 करोड़, 346 गांव &#8211; वर्क ऑर्डर जारी<br>पोकरण-फलसूंड-बालोरा-सिवाना (पार्ट 4): 239.43 करोड़, 10 गांव &#8211; 100% प्रगति<br>नर्मदा नहर आधारित रामसर-गडरारोड़: 167.25 करोड़, 217 गांव &#8211; 99.48% प्रगति<br>नर्मदा आधारित गुड़ामालानी-चौहटन: 3197.34 करोड़, 822 गांव &#8211; टेंडर प्रक्रिया में<br>कुल: 4494.76 करोड़, 1642 गांव &#8211; 389.82 करोड़ व्यय, 21.27% प्रगति<br><br>जमीनी हकीकत पाइपलाइन बिछी, पानी नहीं:<br><br>ग्रामीणों का आरोप है कि कई गांवों में पाइपलाइन डालने का काम अधूरा पड़ा है, वहीं जहां कनेक्शन दिए गए हैं, वहां भी नियमित पानी सप्लाई नहीं हो रही। महीनों से अधूरे पड़े कार्यों ने लोगों की उम्मीदों को तोड़ दिया है। महिलाओं और बच्चों को आज भी दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है, जिससे उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।<br><br>शिव’ क्षेत्र में भी अटका काम:<br><br>जून 2025 में जल जीवन मिशन फेस-3 के तहत 338 करोड़ रुपए की योजना स्वीकृत हुई थी। इसमें शिव के 187, बाड़मेर ग्रामीण के 156 और बायतु के 3 गांवों सहित कुल 346 गांवों को शामिल किया गया। इस कार्य के लिए जोधपुर की दारा कंस्ट्रक्शन कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी हुआ, लेकिन जमीनी प्रगति अभी भी संतोषजनक नहीं है।<br><br>गर्मी शुरू, संकट गहराया:<br><br>मार्च के पहले सप्ताह से ही तेज गर्मी ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। तालाब सूखने की कगार पर हैं और कई गांवों व ढाणियों में पेयजल संकट गहराने लगा है। ग्रामीणों को मजबूरी में महंगे दामों पर पानी खरीदना पड़ रहा है। पशुपालकों के सामने भी पशुधन के लिए पानी की व्यवस्था करना चुनौती बन गया है।<br><br>बढ़ती नाराजगी, अधूरा सपना:<br><br>जल जीवन मिशन से ग्रामीणों को बड़ी उम्मीद थी, लेकिन धीमी प्रगति और अधूरे कार्यों ने लोगों में नाराजगी बढ़ा दी है। हालात यह हैं कि हर घर नल से जल का सपना अब भी अधूरा है, और इस बार भी गर्मी में बाड़मेर के हजारों परिवारों को पानी के लिए जूझना पड़ सकता है।<br><br>एक नजर बॉर्डर के गांव:<br><br>हरसाणी कस्बा: आगासड़ी गांव से आने वाली पाइपलाइन एक महीने से बंद, जेजेएम योजना भी सुचारू नहीं होने से गर्मी में आमजन व पशु दोनों परेशान।<br><br>गिराब क्षेत्र: जलकुंड सूखे, पर्याप्त जल भंडार के बावजूद सप्लाई ठप और कार्मिकों की कमी से व्यवस्था चरमराई।<br><br>डीएनपी गांव: ग्रामीण आज भी बेरियों पर निर्भर हैं। सप्ताह में एक बार पानी, आधे घरों तक भी पर्याप्त सप्लाई नहीं।जेजेएम की जमीनी हकीकत-नोपाट पंचायत की मिसरी की ढाणी में एक साल से पंप हाउस अधूरा-कई जगह वॉल्व नहीं, तो कहीं बिजली कनेक्शन का अभाव-एक कर्मचारी के भरोसे कई गांवों की जल सप्लाई-पाइपलाइन पर खर्च, लेकिन नियमित जल वितरण पर ध्यान नहीं</p>
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		<title>सीएम भजनलाल का कलेक्ट्रेट को आदेश:बारिश से खराबे की गिरदावरी होगी, पटवारियों से मांगी सूचना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dhurva News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Mar 2026 06:15:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Local News]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
		<category><![CDATA[World News]]></category>
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		<category><![CDATA[Politics News]]></category>
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					<description><![CDATA[बाड़मेर :बेमौसम हुई बारिश से जिले में रबी की फसलों को जबरदस्त नुकसान हुआ है। करीब दो दिन बाद अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सभी जिला कलेक्टरों को रबी फसलों में हुए खराबे के नुकसान का आंकलन कर गिरदावरी करने के आदेश दिए है। इसके लिए अब तहसीलदारों ने सभी पटवारियों से उनके अधीन पटवार [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"></p>



<p class="wp-block-paragraph">बाड़मेर :<br>बेमौसम हुई बारिश से जिले में रबी की फसलों को जबरदस्त नुकसान हुआ है। करीब दो दिन बाद अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सभी जिला कलेक्टरों को रबी फसलों में हुए खराबे के नुकसान का आंकलन कर गिरदावरी करने के आदेश दिए है। इसके लिए अब तहसीलदारों ने सभी पटवारियों से उनके अधीन पटवार हल्कों बारिश, ओलावृष्टि से हुए नुकसान की सूचना मांगी है<br><br>गौरतलब है कि 19 मार्च की रात 2 बजे भीषण आंधी के साथ बारिश और ओलावृष्टि हुई थी इससे ईसगोल, जीरा सहित अन्य फसलों को जबरदस्त नुकसान हुआ है। कई किसानों की फसल तो पूरी तरह से नष्ट हो गई, इससे वो कर्जदार हो गए है<br><br>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रदेश के विभिन्न अंचलों में हुई अतिवृष्टि से अन्नदाताओं को हुए नुकसान का आंकलन करने के लिए सभी जिला कलेक्टरों को तत्काल प्रभाव से सर्वेक्षण कर यथाशीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है, ताकि किसानों को हुए नुकसान की भरपाई हो सके इसके बाद अब तहसीलदारों ने पटवारियों को गिरदावरी के निर्देश दिए है। बाड़मेर तहसील में बेमौसम बारिश से सर्वाधिक नुकसान हुआ है<br><br>डूगेरो का तला पंचायत समिति क्षेत्र के हाथीतला आरआई क्षेत्र में हाथीतला, डूगेरो का तला, कगाऊ, सनावड़ा, मूढ़ों का तला, जाखड़ों की ढाणी, रामदेरिया, गरल सहित कई गांवों में 18-19 मार्च की रात को आई तूफानी बारिश से रबी को जबरदस्त नुकसान हुआ। इसके बाद दैनिक भास्कर बर्बादी के मंजर में डूबे किसानों के दर्द को जाना था और खबर प्रकाशित की थी इसके बाद शनिवार को बाड़मेर एसडीएम यशार्थ शर्मा, तहसीलदार हुक्मीचंद सहित आरआई, पटवारी मौजूद रहे<br><br>हाथीतला के पीड़ित किसान खेराजराम पुत्र उदाराम के खेत में पहुंचे, जहां 7 हेक्टेयर की ईसबगोल की फसल पूरी तरह से खराब हुई नजर आई किसान ने पहली बार ही फसल बुवाई थी और करीब 10 लाख का कर्जा लिया था। नया ट्यूबवैल कर पहली खेती में ही किसान को बारिश ने बर्बाद कर दिया। इस तरह का नुकसान बाड़मेर जिलेभर में हुआ है तहसीलदार हुक्मीचंद ने कहा कि हमने सभी पटवारियों को विशेष गिरदावरी के लिए निर्देशित किया है</p>
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		<title>📰 महंगाई और बेरोज़गारी पर सियासत तेज, बयानबाज़ी से गरमाया माहौल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dhurva News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 14:38:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली:देश में बढ़ती महंगाई और बेरोज़गारी को लेकर एक बार फिर राजनीति गरमा गई है। सत्तापक्ष और विपक्ष आम जनता के मुद्दों को लेकर आमने-सामने आ गए हैं। संसद से लेकर सोशल मीडिया तक इस विषय पर लगातार बयान और प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। विपक्ष का आरोप है कि रोज़मर्रा की ज़रूरतों की [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">नई दिल्ली:<br>देश में बढ़ती महंगाई और बेरोज़गारी को लेकर एक बार फिर राजनीति गरमा गई है। सत्तापक्ष और विपक्ष आम जनता के मुद्दों को लेकर आमने-सामने आ गए हैं। संसद से लेकर सोशल मीडिया तक इस विषय पर लगातार बयान और प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br>विपक्ष का आरोप है कि रोज़मर्रा की ज़रूरतों की चीज़ों की कीमतों में बढ़ोतरी से आम आदमी पर सीधा असर पड़ रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद आर्थिक स्थिति को संभालने के प्रयास किए जा रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f525.png" alt="🔥" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> क्यों ट्रेंड में है यह मुद्दा?<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f4c8.png" alt="📈" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> रोज़मर्रा की वस्तुओं की बढ़ती कीमतें<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f477.png" alt="👷" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> युवाओं में रोज़गार को लेकर चिंता<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f399.png" alt="🎙" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> नेताओं के तीखे बयान<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f4fa.png" alt="📺" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> टीवी डिबेट और सोशल मीडिया चर्चा</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br>राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, महंगाई और बेरोज़गारी जैसे मुद्दे चुनावी माहौल में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं, क्योंकि इनका सीधा जुड़ाव आम जनता से है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br><strong><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f4cc.png" alt="📌" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> जनता की राय</strong><br>आम लोग चाहते हैं कि सियासी बयानबाज़ी से आगे बढ़कर ठोस समाधान सामने आएँ, ताकि आर्थिक दबाव कम हो और रोज़गार के अवसर बढ़ें।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br><strong>निष्कर्ष:</strong><br>महंगाई और बेरोज़गारी पर बढ़ती सियासत आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है और यह मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में बना रहेगा।</p>
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		<title>📰 राज्यवार सीट शेयरिंग को लेकर सियासी खींचतान तेज, गठबंधन में बढ़ा सस्पेंस</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dhurva News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Jan 2026 17:52:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Local News]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली:देश की राजनीति में इन दिनों राज्यवार सीट शेयरिंग को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। आगामी चुनावों से पहले गठबंधन में शामिल दलों के बीच यह तय करना चुनौती बन गया है कि किस राज्य में कौन-सी पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। सूत्रों के अनुसार, कई राज्यों में क्षेत्रीय दल अपनी [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">नई दिल्ली:<br>देश की राजनीति में इन दिनों राज्यवार सीट शेयरिंग को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। आगामी चुनावों से पहले गठबंधन में शामिल दलों के बीच यह तय करना चुनौती बन गया है कि किस राज्य में कौन-सी पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br>सूत्रों के अनुसार, कई राज्यों में क्षेत्रीय दल अपनी मजबूत पकड़ का हवाला देते हुए ज़्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय दल संतुलन बनाए रखने की कोशिश में जुटे हैं। इसी को लेकर नेताओं के बयान और जवाबी बयान सामने आ रहे हैं, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f525.png" alt="🔥" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> क्यों चर्चा में है सीट शेयरिंग?<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f5f3.png" alt="🗳" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक समीकरण<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f91d.png" alt="🤝" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> गठबंधन सहयोगियों के बीच मतभेद<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f399.png" alt="🎙" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> बड़े नेताओं के सार्वजनिक बयान<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f4fa.png" alt="📺" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> टीवी डिबेट और सोशल मीडिया पर बहस</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर समय रहते सीट शेयरिंग पर सहमति नहीं बनी, तो इसका सीधा असर चुनावी रणनीति और वोट ट्रांसफर पर पड़ सकता है। वहीं, समझौते की स्थिति में गठबंधन को मजबूती मिलने की संभावना है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f4cc.png" alt="📌" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> जनता पर असर<br>आम मतदाता अब यह देख रहा है कि पार्टियां सिर्फ सत्ता की गणित पर ध्यान देंगी या स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देंगी। सीट शेयरिंग का फैसला यह भी तय करेगा कि चुनाव में कौन-सा गठबंधन कितना मजबूत दिखाई देगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br>निष्कर्ष:<br>राज्यवार सीट शेयरिंग को लेकर चल रही खींचतान आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि गठबंधन में समझौता होता है या सियासी दूरी बढ़ती है।</p>
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		<title>📰 ट्रेंडिंग पॉलिटिक्स: विपक्षी एकता पर फिर बहस तेज, गठबंधन को लेकर सस्पेंस</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dhurva News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Jan 2026 03:58:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Local News]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
		<category><![CDATA[election politics]]></category>
		<category><![CDATA[Indian politics today]]></category>
		<category><![CDATA[Opposition unity India]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली:देश की राजनीति में एक बार फिर विपक्षी एकता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले चुनावों से पहले विपक्षी दलों के बीच तालमेल और नेतृत्व को लेकर अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।कुछ दल गठबंधन को मजबूत करने की बात कर रहे हैं, तो वहीं [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><br>नई दिल्ली:<br>देश की राजनीति में एक बार फिर विपक्षी एकता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले चुनावों से पहले विपक्षी दलों के बीच तालमेल और नेतृत्व को लेकर अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।<br>कुछ दल गठबंधन को मजबूत करने की बात कर रहे हैं, तो वहीं कुछ नेताओं के बयान सियासी समीकरणों को उलझाते नज़र आ रहे हैं। </p>



<p class="wp-block-paragraph">सोशल मीडिया और टीवी डिबेट्स में यह मुद्दा लगातार ट्रेंड कर रहा है।<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f525.png" alt="🔥" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> क्यों ट्रेंड में है विपक्षी एकता?<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f91d.png" alt="🤝" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> गठबंधन बैठकों की खबरें<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f399.png" alt="🎙" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> नेताओं के विरोधाभासी बयान<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f4fa.png" alt="📺" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> टीवी डिबेट और सोशल मीडिया चर्चा<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f5f3.png" alt="🗳" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> चुनाव से पहले रणनीतिक दबाव</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br>राजनीतिक जानकारों के अनुसार, अगर विपक्ष साझा रणनीति बनाने में सफल होता है तो चुनावी मुकाबला काफी रोचक हो सकता है। वहीं असहमति की स्थिति में सत्तापक्ष को फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f4cc.png" alt="📌" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> जनता की नजर<br>आम मतदाता अब यह देखना चाहता है कि विपक्ष सिर्फ बयानबाज़ी करता है या वास्तव में कोई ठोस विकल्प पेश करता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br>निष्कर्ष:<br>विपक्षी एकता पर चल रही बहस आने वाले दिनों में और तेज होगी और इसका सीधा असर चुनावी माहौल पर पड़ेगा।</p>
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