EWS सरलीकरण की चिंगारी को आवाज दे रहे रविंद्र सिंह भाटी, आखिर मुद्दा इतना बड़ा क्यों है?

बाड़मेर/जयपुर। राजस्थान में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS से जुड़े नियमों के सरलीकरण का मुद्दा अब सरकारी प्रक्रियाओं से निकलकर सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने EWS व्यवस्था में बदलाव और प्रक्रियाओं को आसान बनाने की मांग को लेकर प्रदेशव्यापी जन-संवाद यात्रा शुरू की है।
भाटी की मांगों में EWS पात्रता के लिए जमीन से जुड़े मानदंडों की समीक्षा, प्रमाण-पत्र की वैधता बढ़ाना, आय निर्धारण प्रक्रिया को सरल करना और राजस्थान में जारी EWS प्रमाण-पत्र को केंद्रीय सेवाओं व केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में मान्यता देने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
आखिर जमीन का नियम इतना महत्वपूर्ण क्यों?केंद्रीय EWS व्यवस्था में परिवार की सकल वार्षिक आय ₹8 लाख से कम होना एक प्रमुख शर्त है। लेकिन इसके साथ संपत्ति संबंधी मानदंड भी लागू हैं। केंद्र सरकार के अनुसार, पांच एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि रखने वाला परिवार आय सीमा के भीतर होने के बावजूद केंद्रीय EWS पात्रता से बाहर हो सकता है।
यहीं से पश्चिमी राजस्थान जैसे क्षेत्रों में बहस का एक प्रमुख बिंदु सामने आता है।एक ही रकबे की जमीन की आर्थिक उपयोगिता हर क्षेत्र में समान नहीं होती। सिंचाई, वर्षा, मिट्टी की उत्पादकता, स्थानीय भूमि मूल्य और कृषि से होने वाली वास्तविक आय जैसे कारक किसी परिवार की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।भाटी इसी आधार पर जमीन के केवल क्षेत्रफल के बजाय उसकी उत्पादकता और आर्थिक उपयोगिता को भी पात्रता निर्धारण में शामिल करने की मांग कर रहे हैं।
प्रमाण-पत्र की वैधता बढ़ाने की मांगभाटी ने EWS प्रमाण-पत्र की वर्तमान प्रक्रिया को भी सरल बनाने की मांग उठाई है। उनकी मांग है कि प्रमाण-पत्र की वैधता तीन से पांच वर्ष तक बढ़ाने पर विचार किया जाए, ताकि पात्र परिवारों को बार-बार दस्तावेजी प्रक्रिया से न गुजरना पड़े।
राजस्थान सरकार की वेबसाइट पर राज्य और केंद्र—दोनों के लिए EWS Income & Asset Certificate की अलग-अलग सेवाएं उपलब्ध हैं।
केंद्र में राज्य के EWS प्रमाण-पत्र की मान्यताअभियान का एक प्रमुख हिस्सा यह मांग भी है कि राजस्थान सरकार द्वारा जारी EWS प्रमाण-पत्र को केंद्रीय सेवाओं और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में भी मान्यता मिले।इसका उद्देश्य अलग-अलग स्तर पर प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया को कम करना बताया गया है।
युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं से भी जुड़ा मुद्दा EWS बहस केवल आरक्षण तक सीमित नहीं है। भाटी ने प्रतियोगी परीक्षाओं में EWS अभ्यर्थियों के लिए आयु सीमा और आवेदन शुल्क में उचित राहत, EWS विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति और छात्रावास जैसी सुविधाओं की भी मांग रखी है।
यही वजह है कि इस मुद्दे का सीधा संबंध प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं, विद्यार्थियों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से बनता है।75 से ज्यादा विधायकों के समर्थन का दावाभाटी की ओर से दावा किया गया है कि पक्ष और विपक्ष के 75 से अधिक विधायकों ने EWS सरलीकरण की मांग के समर्थन में पत्र दिए हैं। इस संख्या और समर्थन की स्वतंत्र पुष्टि अलग से किए जाने की जरूरत है; फिलहाल यह भाटी द्वारा बताया गया दावा है
अब सबसे बड़ा सवाल सरकार के जवाब काइस अभियान के बीच केंद्र सरकार का मौजूदा रुख भी महत्वपूर्ण है। 5 अगस्त 2026 को लोकसभा में दिए गए जवाब के अनुसार, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने कहा था कि मौजूदा EWS आरक्षण प्रावधानों में संशोधन का कोई प्रस्ताव उसके पास विचाराधीन नहीं है।
इसलिए अब राजस्थान में उठ रही मांगों और केंद्र के मौजूदा रुख के बीच आगे की राजनीतिक एवं प्रशासनिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।क्या EWS मुद्दा राजनीतिक रूप ले सकता है?इसे लेकर अभी किसी नए वोट बैंक के बनने या किसी राजनीतिक दल के वोट बैंक पर प्रभाव पड़ने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। इसके लिए चुनावी आंकड़ों और लंबे समय के मतदाता व्यवहार का अध्ययन जरूरी होगा।फिलहाल इतना स्पष्ट है कि रविंद्र सिंह भाटी ने EWS की तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं को सार्वजनिक बहस का विषय बनाया है। उनकी जन-संवाद यात्रा 25 सितंबर से शुरू हुई और बाड़मेर से आगे पश्चिमी राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंच रही है।
अब सवाल यही है—कागजों में सरलीकरण होगा या जमीन पर समाधान?
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